कमल फूल की खेती : इन किसानों को दिवाली का बेसब्री से इंतजार

दिवाली आते ही बाजार गुलजार होने लगता है। दिवाली को लेकर लोगों में एक अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। इस पर्व में यदि सबसे ज्यादा किसी चीज की डिमांड होती है तो वह कमल का फूल। इसके बिना लक्ष्मी पूजा अधूरी मानी जाती है। फूल तैयार करने में किसानों को पूरे छह माह लगते हैं। इसके लिए वे दिन-रात कड़ी मेहनत कर फूल तैयार करते हैं, ताकि लोगों को आसानी से फूल मिल सके। किसान इस पर्व का पूरे साल भर इंतजार करते हैं, क्योंकि इसी से उनका घर चलता है और उनकी दिवाली मनती है। राजधानी के मठपारा स्थित कमल फूल की खेती कर रहे किसान भरत ढीमर बताते हैं कि सालभर दिवाली के त्योहार का बेसब्री से इंतजार करता है।

यह ऐसा पर्व है, जिसकी बदौलत गरीब किसानों के घरों में दीप जल पाते हैं। लोग जिस कीचड़ को देखकर अपना मुंह फेरते हैं, हम उसी कीचड़ से कमल का फूल खिलाते हैं। वे कहते हैं कि पूरे साल में दो बार इसकी खेती होती है, लेकिन दीपावली के समय ही उन्हें थोड़ा लाभ मिल पाता है। इसके चलते उनकी दिवाली मन पाती है।

शहर के बीचोबीच मठपारा के पास स्थित एक ऐसी जगह है, जहां सालों से कमल फूल की खेती की जा रही है। किसानों के मुताबिक यहां तकरीबन 50 एकड़ कृषि जमीन पर खेती होती थी, लेकिन नेशनल बस स्टैण्ड में 30 एकड़ कृषि भूमि शामिल हो गई। इसके चलते अब 20 एकड़ में खेती की जा रही है।

किसान विजय ढीमर बताते हैं कि उनका पूरा परिवार इसी खेती पर आधारित है। दिवाली उनके परिवार के लिए सबसे बड़ा पर्व है, क्योंकि इस पर्व में ही कमल की बिक्री होती है। जिससे परिवार का भरण पोषण हो पाता है।

कीटनाशक पर खर्च ज्यादा

किसान बताते हैं कि एक एकड़ में तकरीबन 10 हजार के दवाई लग जाते हैं। जितने की इनकम नहीं होती उससे ज्यादा के किटनाशक दवाइयों में रुपए खर्च लगता है। वहीं इसके लिए 10 से 12 बनिहार भी लगाने होते हैं उन्हें भी इसके लिए रोजगार देना होता है।

दादा किया करते थे खेती

किसान भरत बताते हैं कि तकरीबन 40 साल पहले दादा दाऊलाल ढीमर इसकी खेती करते थे। उसके बाद पिता मुकुंद ने लंबे समय तक इसकी बागडोर संभाले रखा था। अब 10 साल से वे इसकी खेती कर रहें हैं। वहीं एक और किसान विजय ढीमर तीसरी पीढ़ी का है जो इस परंपारगत खेती करते आ रहे हैं।

बारिश से फसल को नुकसान

कमल की खेती करने वाले किसान कुलेश ढीमर कहते हैं कि इस साल किसानों को काफी नुकसान हुआ है। देर से आए मानसुन ने किसानों की खेती को प्रभावित किया है। वे कहते हैं कि अभी भी बारिश हो रही है जिसके चलते फसल को काफी नुकसान हुआ है।

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