सीमेंट की बोरियों में खेती, जबलपुर के कृषि वैज्ञानिकों ने किया यह कमाल

जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय (जनेकृविवि) के वैज्ञानिक कृषि कम लागत पर ज्यादा उत्पादन के सिद्धांत पर खरे उतर गए हैं। उन्होंने एक ऐसा मॉडल तैयार कर लिया है, जो कृषि, किसान और अनुसंधान, तीनों पर खरा उतरा है। दरअसल, कृषि वैज्ञानिक डॉ.मोनी थॉमस और उनके छह विद्यार्थी सुमित ककड़े, धनेश्वर पाटील, राहुल पाटीदार, शिवम वाजपेयी, अंकित और विशाल ने जवाहर मॉडल तैयार किया है, जो कम लागत पर अधिक आय देगा। इस तकनीक में सीमेंट की बोरी में एक साथ कई फसल ली जा सकती हैं। इसके लिए न तो उपजाऊ जमीन की जरूरत होगी, न ही पर्याप्त पानी की और न ही अधिक पैसों की। बोरी पर खेती तकनीक से किसान फल, फूल, सब्जी और दाल की खेती कर सकेगा। इस तकनीक का सफल उपयोग करने के बाद मंगलवार को विवि के कुलपति डॉ. प्रदीप बिसेन ने जवाहर मॉडल का उद्धाटन किया। इस अवसर पर विवि के डीन-डायरेक्टर से लेकर वैज्ञानिक, किसान और विद्यार्थी मौजूद रहे।

ऐसा है जवाहर मॉडल 

– यह मॉडल पूरी तरह से आधुनिक परिप्रेक्ष्य को देखकर तैयार किया गया है

– इसमें सीमेंट की एक खाली बोरी में मिट्टी, खाद डालकर अरहर का पेड़ लगाया गया

– इस पेड़ पर लाख के कीड़े छोड़े गए, बोरी की मिट्टी में धनिया बोई गई

– दो पेड़ों के बीच 6 फीट की जगह छोड़ी गई, ताकि पेड़ को बढ़ने पर्याप्त जगह मिले

– इस 6 फीट की खाली जगह पर हल्दी, अदरक,प्याज, लहसुन लगाया गया

एक अरहर के पेड़ से उत्पादन 

– अरहर दो किलो

– 200 ग्राम धनिया की

– 600 ग्राम लाख

– 2.5 किलो जलाई लकड़ी मिलेगी

– इसके अलावा हल्दी, अदरक, प्याज, लहसुन

फायदा

– आधे एकड़ में 140 पौधे लगाए, इसके साथ अन्य फसल ली। इस पर एक साल में 39 हजार स्र्पए खर्च किए, जिससे शुद्ध लाभ 50 हजार का हुआ।

डिंडौरी-दमोह के किसानों ने देखी तकनीक

कुलपति डॉ.बिसेन ने कहा कि इस तरह का मॉडल किसानों की आय को दो से तीन गुना करने में मदद करेगा। इस वक्त कृषि का भविष्य कम लागत-अधिक लाभ पर निर्भर है। विवि के वैज्ञानिकों ने इस पर बेहतर काम किया है। इस अवसर पर डिंडौरी और दमोह जिले से आए 100 से ज्यादा किसानों ने जवाहर मॉडल को देखा । डिंडौरी से आईं सरस्वती, भावना, जीराबाई ने बताया कि वह अरहर की खेती करती हैं, लेकिन इस तकनीक से नहीं, लेकिन अब इसकी मदद से वह एक साथ कई फसल ले सकेंगी।

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