विराट ने आईसीसी टेस्ट चैंपियनशिप के फॉर्मेट पर फिर उठाए सवाल

टीम इंडिया टेस्ट क्रिकेट में लगातार जबर्दस्त प्रदर्शन कर रही है। फिलहाल वो 360 अंकों के साथ आईसीसी टेस्ट चैंपियनशिप में सबसे ऊपर है। भारत के वर्चस्व का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दूसरे स्थान पर मौजूद ऑस्ट्रेलिया के 116 अंक हैं। इतने बड़े अंतर के बीच टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली ने आईसीसी टेस्ट चैंपियनशिप के फॉर्मेट में बदलाव की मांग की है।

बता दें कि आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया-इंग्लैंड के बीच एशेज सीरीज 2019 के साथ हुई। भारत ने वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के तहत अपनी पहली टेस्ट सीरीज वेस्टइंडीज के खिलाफ खेली। वहां टीम इंडिया ने 3 मैचों की सीरीज 3-0 से जीतकर धमाकेदार आगाज किया। इसके बाद से वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप कीअंक तालिका में टीम इंडिया का लगातार दबदबा बना हुआ है।

भारत ने रविवार को कोलकाता में हुए अपने पहले डे-नाइट टेस्ट में बांग्लादेश को पारी व 46 रनों से हराया। ये इस सीरीज का दूसरा और अंतिम मैच था। ये भारत की लगातार तीसरी सीरीज जीत रही। तीनों में उसने विपक्षी टीम का सफाया किया। वेस्टइंडीज को 2-0 से हराने के बाद उसने दक्षिण अफ्रीका को 3 मैचों की सीरीज में 3-0 और अब 2 मैचों की सीरीज में बांंग्लादेश को 2-0 से हराया। ऐसे में टीम इंडिया ने आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप अंक तालिका में 360 अंकों के साथ शीर्ष पर है।

इस जीत के बाद कप्तान विराट कोहली ने एक बार फिर चैंपियनशिप के फॉर्मेट को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज के दौरान भी अंक निर्धारण को लेकर अपनी आपत्ति जताई थी। उन्होंने आईसीसी को सुझाव दिया था कि विदेशी धरती पर जीत हासिल करने पर टीमों को ज्यादा अंक दिए जाने चाहिए क्योंकि ये विपरित परिस्थितियों में मिली जीत होती है। वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में होम और अवे फॉर्मेट पर सीरीज होनी चाहिए। ऐसा करने पर ही टीमों के बेहतर प्रदर्शन का सही आकलन हो पाएगा। मुझे लगता है कि अधिक संतुलित प्रारूप यह होगा कि एक सीरीज स्वदेश में और एक विरोधी के मैदान पर खेली जाए। हम काफी अच्छा क्रिकेट खेल रहे हैं लेकिन टेस्ट चैंपियनशिप में हमने विरोधी के मैदान पर सिर्फ दो टेस्ट खेले हैं। हमारे प्रदर्शन पर आप हमारी टीम की तारीफ कर सकते हैं, लेकिन हम ये नहीं जानते कि हम सर्वश्रेष्ठ हैं या नहीं। ये तभी साबित होगा जब हम बराबरी से देश और विदेश दोनों में जीत हासिल करें। हमें लगता है कि हम अन्य टीमों की तुलना में अधिक दबादबा बना रहे हैं। ऐसे में हमें विपक्षी टीमों के मैदान पर खेलने का मौका भी मिलना चाहिए था। यदि सीरीज के मैच बराबरी से देश और विदेश में होते और हम ऐसा ही खेलते तो हम ज्यादा खुश होते।

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