95000 क्लाइंट्स के शेयर गिरवी रख कार्वी ने जुटाए थे 600 करोड़ रुपये

कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग ने करीब 95000 क्लाइंट्स के 2300 करोड़ रुपये के शेयर तीन प्राइवेट बैंकों और एक बड़ी नॉन-बैंकिंग फाइनैंस कंपनी के पास गिरवी रख दिए थे। उसने इसके जरिए अपने लिए 600 करोड़ रुपये का कर्ज जुटाया था। मामले की जानकारी रखने वाले दो लोगों ने बताया कि सिक्यॉरिटीज ऐंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया(SEBI) को इसका पता तब चला, जब उसने कुछ रिटेल ब्रोकरों के क्लाइंट पोजिशंस की जांच की। जांच रिपोर्ट अभी जारी नहीं गई है।

पिछले हफ्ते सेबी ने कार्वी को नए क्लाइंट्स जोड़ने से रोक दिया था। ऐसा क्लाइंट्स के 2000 करोड़ रुपये नहीं लौटा पाने के मामले में किया गया। सेबी के आदेश में कहा गया कि ब्रोकिंग फर्म ने क्लाइंट्स के पावर ऑफ अटॉर्नी का दुरुपयोग किया और 1096 करोड़ रुपये अपने ग्रुप की कंपनी कार्वी रियल्टी में ट्रांसफर कर दिए।

एक सूत्र ने बताया कि मई में सेबी ने जब क्लाइंट पोजिशंस की एक और जांच की तो पता चला कि कार्वी ने क्लाइंट्स के कितने मूल्य के शेयर गिरवी रख दिए थे।

उन्होंने बताया, ‘सेबी ने क्लीयरिंग कॉर्पोरेशंस के पास ब्रोकरों के ओपनिंग बैलेंस का वेरिफिकशन किया। क्लाइंट ट्रांजैक्शंस का मिलान डिपॉजिटर्स के साथ किया गया। सेबी को ऐसा करते हुए एक दिन में 21000 अलर्ट मिले थे।’ उन्होंने बताया, ‘इसके बाद पाया गया कि क्लाइंट्स के शेयरों को उनके डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट अकाउंट के बजाय थर्ड पार्टी अकाउंट्स में ट्रांसफर कर दिया गया था।’

सेबी के 22 नवंबर के आदेश में कहा गया था कि NSE ने कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग का ‘लिमिटेड परपज इंस्पेक्शन’ 1 जनवरी 2019 से 19 अगस्त 2019 के बीच किया।

कुछ महीने पहले कार्वी की ओर से क्लाइंट्स के 2800 करोड़ रुपये के शेयर गिरवी रख दिए गए थे। अब यह आंकड़ा 2300 करोड़ पर आ गया है। सूत्र ने बताया, ‘पिछले कुछ महीनों में सेबी कार्वी पर गिरवी शेयरों की मात्रा घटाने का दबाव बनाता रहा है।’

सेबी ने क्लाइंट्स के शेयरों को लेंडर्स के पास गिरवी रखने को अवैध करार दिया है। सेबी इस मामले में लेंडर्स की भूमिका का मसला फाइनैंस मिनिस्ट्री और RBI के सामने उठाने वाला है। दूसरे सूत्र ने कहा, ‘बैंक आखिर क्लाइंट्स के शेयरों को बतौर जमानत स्वीकार कर फर्मों को लोन कैसे दे सकते हैं? लोन देने से पहले वे किस तरह की जांच-पड़ताल कर रहे हैं?’ सेबी के प्रवक्ता ने इस मामले में कॉमेंट्स के अनुरोध का जवाब नहीं दिया।

कार्वी ने ईटी के सवालों के जवाब में कहा कि क्लाइंट्स के शेयर गिरवी रखकर करीब 400 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया था, न कि 2300 करोड़ का। उसके प्रवक्ता ने कहा, ‘क्लाइंट्स के शेयरों को तो सभी ब्रोकिंग कंपनियां बैंकों के पास गिरवी रखती आई हैं। बैंकों के पास वही शेयर गिरवी रखे जाते हैं, जिनके लिए क्लाइंट्स ने पूरा पेमेंट न किया हो। पूरा पेमेंट ही नहीं किया तो ये शेयर क्लाइंट के कैसे हो गए?’

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