मध्य प्रदेश में ग्लोबल टेंडरों पर रोक, देश में बने उपकरण ही खरीदेगी सरकार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्म निर्भर भारत’ मंत्र को अमलीजामा पहनाने के लिए शिवराज सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए ग्लोबल टेंडरों पर रोक लगा दी है। अब ऐसा कोई भी उपकरण नहीं खरीदा जाएगा, जिसकी आपूर्ति विदेश से होती हो। इसी तरह लॉकडाउन के कारण वापस लौटे मजदूरों को रोजगार दिलाने के लिए ‘कोई नहीं रहेगा बेरोजगार, सबको मिलेगा रोजगार’ अभियान 22 मई को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान शुरू करेंगे। गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ.नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि मंत्रालय में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में मंत्रियों-अधिकारियों के साथ हुई बैठक में कई निर्णय लिए गए हैं। इसमें तय किया है कि लोकल के लिए वोकल की तर्ज पर ग्लोबल टेंडर पर रोक रहेगी।

स्वास्थ्य हो या फिर अन्य कोई विभाग, ऐसा कोई उपकरण नहीं ले सकेगी, जिसकी आपूर्ति विदेश से होती हो। देश में बनने वाले उपकरण ही आगे लिए जाएंगे। यदि हमारे देश में ऐसी कोई चीज बनती ही नहीं है और वो बेहद जरूरी हो तो फिर छूट दी जा सकती है। केंद्र सरकार द्वारा घोषित आत्मनिर्भर भारत के तहत पैकेज का लाभ प्रदेश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को दिलाने के लिए भी रणनीति बनाई गई है। ‘कोई नहीं रहेगा बेरोजगार, सबको मिलेगा रोजगार’ अभियान के तहत मनरेगा के जॉब कार्ड बनाए जाएंगे। जनपदों में यह कार्ड विधायक वितरित करेंगे।

डॉ.मिश्रा ने उम्मीद जताई कि मनरेगा में 40 लाख लोगों को रोजगार दिया जाएगा। इसके लिए पंचायतों में नए कामों की शुरुआत होगी। इनमें मंदिर की खाली पड़ी जमीन पर तालाब (सरोवर), मंदिर उद्यान और मंदिर में गोशाला का निर्माण कराया जाएगा। इनका संचालन पुजारी करेंगे। इसके अलावा हर पंचायत में जल संरचनाएं भी बनाई जाएंगी। इसका रोडमैप पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने तैयार कर लिया है।

मप्र को मिल सकते हैं 11,390 करोड़ रुपये

बैठक में बताया गया कि मनरेगा के लिए पैकेज में 40 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसमें से 11,390 करोड़ रुपये मध्यप्रदेश को मिल सकते हैं। पिछले सीजन में 10 लाख लोगों को मनरेगा में रोजगार मिला था। इस हिसाब से देखा जाए तो एक सीजन में सर्वाधिक रोजगार अब शिवराज सरकार दिलाएगी। इस दौरान केंद्र सरकार के पैकेज का अधिक से अधिक लाभ लेने के लिए विभागों की रणनीति पर प्रस्तुतिकरण भी हुआ। बैठक में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, कृषि मंत्री कमल पटेल, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं सहकारिता मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, आदिम जाति कल्याण मंत्री मीना सिंह, मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।

एक लाख 91 हजार को मिलेंगे 10-10 हजार रुपये

बैठक में यह भी बताया गया कि प्रदेश में एक लाख 92 हजार शहरी विक्रेता चिन्हित हैं। प्रवासी मजदूरों के लौटने के बाद यह संख्या और बढ़ सकती है। इन सभी को केंद्र सरकार की योजना का लाभ दिलाने के लिए नगरीय निकायों में पथ विक्रेता कल्याण योजना लागू की जाएगी। इसके तहत दस-दस हजार रुपये फिर से अपना रोजगार खड़ा करने के लिए दिलवाए जाएंगे। फिर शुरू होगी दीनदयाल रसोई बैठक में प्रमुख सचिव नगरीय विकास एवं आवास नीतेश व्यास ने बताया कि दीनदयाल रसोई योजना उपयोगी है। इसे फिर से पुराने स्वरूप में लौटाकर गरीबों को भोजन उपलब्ध कराया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से इसे फिर शुरू किया जाए। वहीं, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम (एमएसएमई) उद्यम विभाग की प्रमुख सचिव दीपाली रस्तोगी ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा एमएसएमई की परिभाषा में संशोधन से 72 वृहद इकाइयां इस श्रेणी में आ जाएंगी। इन्हें अतिरिक्त कर्ज देने के साथ बीमार इकाइयों का लाभांवित करने पर भी विचार किया जा रहा है।

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