बेंगलुरू की जामा मस्जिद ने की अपील, घर में ईद मनाएं मुस्लिम, गले मिलने से करें परहेज

कोरोना वायरस की वजह से देशभर में चल रहे लॉकडाउन के चौथे चरण के बीच इस हफ्ते ईद आने वाली है। लिहाजा, कर्नाटक में मुस्लिम समुदाय के बुजुर्ग नए दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इनमें बताया गया है कि आने वाले त्योहार को कैसे मनाया जाए। बेंगलुरू की जामा मस्जिद ने मुस्लिम समुदाय के लोगों से अपील की है कि वे मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए नहीं निकलें। किसी से गले नहीं लगें और हाथ मिलाने से बचें।

इसके साथ ही सार्वजनिक सभा या रिश्तेदारों और दोस्तों से ईद मिलने के लिए घरों से न निकलें। इस बार ईद घरों में रहकर ही मनाएं। समुदाय के बुजुर्गों ने सभी के लिए छह-सूत्रीय जनादेश जारी किया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस वर्ष ईदगाह मैदान खाली रहें। पूर्व केंद्रीय मंत्री सीएम इब्राहिम जैसे कुछ नेताओं द्वारा मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को पत्र लिखा था कि क्या एक विशेष अवसर के रूप में ईद के लिए लॉक डाउन में ढील दी जा सकती है। इसके कुछ दिनों बाद दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

सामुदायिक नेताओं ने इन राजनेताओं की राय से किनारा कर लिया और कहा कि वे घर में नमाज पढ़ना पसंद करेंगे। बेंगलुरु की जामा मस्जिद के इमाम मकसूद इमरान ने कहा कि मौजूदा महामारी की स्थिति में किसी भी तरह की सार्वजनिक सभा को करना असंभव है। इसलिए, ईदगाह पर ईद की नमाज नहीं होगी।

उन्होंने कहा- हम सभी मुस्लिम भाइयों और बहनों से अपील करते हैं कि वे ईद की मुबारकबाद देने के लिए गले न लगें क्योंकि इससे वायरस फैल सकता है। घरों से बाहर निकलना भी हानिकारक है। घर पर रहें और खुद को बचाएं और दूसरों को भी बचाएं। बताते चलें कि इमरान राज्य में सभी अन्य मस्जिदों की अध्यक्षता करते हैं।

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