जानिए किसान आंदोलन पर आज क्या हो रहा

सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानूनों के अमल पर रोक लगा चुका है, इसके बावजूद किसानों का धरना प्रदर्शन जारी है। इस बीच, प्रदर्शनकारी किसानों और सरकार, दोनों के लिए शुक्रवार का दिन अहम होने जा रहा है। राजधानी दिल्ली के विज्ञान भवन में किसान संगठनों और सरकार के बीच 9वें दौर की वार्ता हो रही है। वहीं पूरे मामले पर राजनीति हो रही है। जब विज्ञान भवन में किसानों और सरकार के बीच वार्ता हो रही है, तब राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेस प्रदर्शन कर रही है। कांग्रेस ने आज इस मुद्दे पर देशभर में राजभवनों का घेराव करने का प्लान बनाया है। दिल्ली में एलजी हाउस के घेराव किया जाएगा, जिसमें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी शामिल होंगे। बैठक में रवाना होने से पहले किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि उन्हें तीनों बिल वापस लेने से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। यदि सरकार बैठक में पुरानी बातें दोहराती है तो वे तत्काल उठकर बाहर आ जाएंगे।

वार्ता से पहले केंद्रीय कृषि नरेंद्र सिंह तोमर ने उम्मीद जताई है कि आज की वार्ता सफल रहेगी। वहीं बैठक शुरू से होने से पहले केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का सम्मान होना चाहिए। जो किसान 26 जनवरी पर प्रदर्शन की बात कह रहे हैं, वो गलत है। राकेश टिकैत (BKU) के 26 जनवरी को परेड वाले बयान पर अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कहा, इसके बारे में मैं कुछ कह नहीं सकता यह उनकी व्यक्तिगत राय हो सकती है। हमारा तरीका क्या होगा, कहां तक जाएंगे, इसका रूट क्या होगा यह हम 18 जनवरी को विस्तार से चर्चा करके तय करेंगे। बता दें किसान नेताओं की तरह से लगातार बयान आ रहे हैं कि वे 26 जनवरी को दिल्ली में होने वाली ट्रैक्टर रैली की तैयारी कर रहे हैं। गणतंत्र दिवस के मौके पर होने वाली इस ट्रैक्टर रैली का मामला सुप्रीम कोर्ट में भी उठा है, जहां सोमवार को अहम सुनवाई होना है।

सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले पर सोमवार और मंगलवार को सुनवाई की थी। मंगलवार को सर्वोच्च अदालत ने तीनों कृषि कानूनों पर रोक लगाने के साथ ही एक कमेटी का गठन भी किया, ताकि सरकार और किसान संगठन किसी एक राय पर पहुंचे। हालांकि किसान संगठन कमेटी के गठन से खुश नहीं है। उनका मानना है कि इससे मामला सुलझेगा नहीं, बल्कि टलेगा। चार सदस्यीय कमेटी में शामिल एक सदस्य (भूपेंद्र सिंह मान) ने तो कमेटी से बाहर निकलने का फैसला कर लिया है। मान ने अपने ताजा बयान में कहा है कि किसान संगठन कमेटी के सामने पेश नहीं होना चाहता हैं, ऐसे में कमेटी में बने रहने का कोई औचित्य नहीं है।

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