ह्दय व गुर्दे पर डेंगू का डंक, बमुश्किल बची पुलिस आरक्षक की जान, दो महिलाओं की मौत

हनुतानताल थाने में पदस्थ पुलिस आरक्षक को चिकित्सकों ने मौत के मुंह से बाहर निकालने में सफलता पाई। डेंगू के डंक से आरक्षक का ह्दय 70 फीसद काम करना बंद कर दिया था। इतना ही नहीं खांसी होने पर उसके मुंह व फेफड़े से खून बहने लगा था। गुदा के रास्ते से भी रक्तस्त्राव होने लगा था। आरक्षक का ब्लडप्रेशर इतना घट गया था उसकी जान बचाने के लिए जीवन रक्षक प्रणाली पर रखना पड़ा। डेंगू ने एक अन्य मरीज के गुर्दे पर हमला कर दिया था। करीब 10 दिन चले उपचार के बाद उसकी जान बचाई जा सकी। चिकित्सकों का कहना है कि डेंगू के उपचार में असावधानी मरीज के मल्टीपल आर्गन फेल्योर का कारण बन सकती है। यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है। डेंगू के कारण गंभीर जोखिम में पहुंचे दोनों मरीजों का उपचार मेट्रो हास्पिटल में किया जा रहा था। जहां से दोनों को छुट्टी दे दी गई है। इधर, गुरुवार को शहर में डेंगू के 11 नए मरीज सामने आए जिसके बाद मरीजों की कुल संख्या बढ़कर 457 हो गई। वहीं अब तक मलेरिया के 10 तथा चिकनगुनिया के 43 मरीज सामने आ चुके हैं। वहीं सैनिक सोसायटी निवासी एक महिला की गुरुवार सुबह डेंगू से मौत हो गई। पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि कुछ दिन से बुखार से पीडि़त महिला को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लगातार प्लेटलेट्स काउंट घटने के कारण उसकी मौत हो गई। इसी प्रकार गोराबाजार क्षेत्र निवासी रुकमणी देवी की गुरुवार देर रात लगातार बुखार आने की वजह से मौत हो गई स्वजन जान बचाने की उम्मीद में उसे लेकर निजी अस्पतालों के चक्कर लगाते रहे अस्पतालों में यही जवाब मिलता रहा कि आइसीयू खाली नहीं है कहीं और ले जाओ। एक अस्पताल के चिकित्सक ने आशंका जताई कि महिला डेंगू की चपेट में थी जिसके चलते उसकी मौत हो गई। स्वजन ने बताया कि कुछ दिन पूर्व रुकमणी को बुखार की समस्या शुरू हुई थी। स्थानीय चिकित्सक ने टाइफाइड बीमारी बताई थी। जिसका घर पर रखकर उपचार किया जा रहा था। गुरुवार देर रात अचानक घर पर उसकी तबीयत बिगड़ गई जिसके बाद आप उसे अस्पताल के लिए रवाना किया गया।

दिन में काटते हैं मच्छर, रात में लगाते हैं मच्छरदानी : मेट्रो हास्पिटल के भेषज विशेषज्ञ डॉ. शैलेंद्र राजपूत ने बताया कि डेंगू फैलाने वाले मादा एडीज एजिप्टी मच्छर दिन में हमला करते हैं। जबकि अधिकांश घरों में मच्छरों से बचाव के उपाय रात्रि विश्राम के दौरान किए जाते हैं। रासायनिक पदार्थ अथवा मच्छरदानी का उपयोग प्राय: रात में किया जाता है। सुबह होते ही बिस्तर से मच्छरदानी हटा दी जाती है। इसलिए डेंगू से बचाव के लिए आवश्यक है कि दिन में मच्छरों से प्रभावी बचाव किया जाए। डेंगू के अधिकांश मरीजों से बातचीत करने पर इस गड़बड़ी का पता चलता है। उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार रक्त में प्लेटलेट्स की मात्रा 10 हजार से कम अथवा रक्तस्त्राव की स्थिति में प्लेटलेट्स चढ़ाया जाना चाहिए। आवश्यकता के बगैर प्लेटलेट्स चढ़ाने का मरीज को खास फायदा नहीं होता है। डेंगू के मरीज को अनावश्यक तौर पर प्लेटलेट्स चढ़ाने के लिए स्वजन को चिकित्सकों को बाध्य नहीं करना चाहिए।

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